भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ६.२० ·

English

मूल श्लोक

यत्रोपरमते चित्तं निरुद्धं योगसेवया ।यत्र चैवात्मनाऽऽत्मानं पश्यन्नात्मनि तुष्यति ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

yatroparamate cittaṃ niruddhaṃ yogasevayā yatra caivātmanā''tmānaṃ paśyannātmani tuṣyati

६.२०अध्याय ६ · अध्यात्मयोग४७ में से श्लोक २०

अनुवाद

योगानुष्ठान से निरुद्ध चित्त जिस स्थान में रम जाता है, और जहाँ स्वयं आत्मा को देख कर आत्मा में ही सन्तुष्ट हो रहता है,

— Lokmanya Tilak

अध्याय ६, श्लोक ६.२०