भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १.२१ ·

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मूल श्लोक

हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते ।अर्जुन उवाच ।सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

hṛṣīkeśaṃ tadā vākyamidamāha mahīpate arjuna uvāca senayorubhayormadhye rathaṃ sthāpaya me'cyuta

१.२१अध्याय १ · अर्जुनविषादयोग४७ में से श्लोक २१

अनुवाद

हे राजा धृतराष्ट्र! श्रीकृष्ण से ये शब्द बोला – अर्जुन ने कहा – हे अच्युत! मेरा रथ दोनों सेनाओं के बीच ले चलकर खड़ा करो,

— Lokmanya Tilak

अध्याय १, श्लोक १.२१