भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १.२० ·

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मूल श्लोक

अथ व्यवस्थितान्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान्कपिध्वजः ।प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

atha vyavasthitāndṛṣṭvā dhārtarāṣṭrānkapidhvajaḥ pravṛtte śastrasampāte dhanurudyamya pāṇḍavaḥ

१.२०अध्याय १ · अर्जुनविषादयोग४७ में से श्लोक २०

अनुवाद

अनन्तर कौरवों को व्यवस्था से खड़े देख, परस्पर एक दूसरे पर शस्त्रप्रहार होने का समय आने पर, कपिध्वज पांडव अर्थात् अर्जुन,

— Lokmanya Tilak

अध्याय १, श्लोक १.२०