भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ९.५ ·

English

मूल श्लोक

न च मत्स्थानि भूतानि पश्य मे योगमैश्वरम् ।भूतभृन्न च भूतस्थो ममात्मा भूतभावनः ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

na ca matsthāni bhūtāni paśya me yogamaiśvaram bhūtabhṛnna ca bhūtastho mamātmā bhūtabhāvanaḥ

९.५अध्याय ९ · राजविद्याराजगुह्ययोग३४ में से श्लोक ५

अनुवाद

और मुझमें सब भूत भी नहीं हैं! देखो, (यह कैसी) मेरी ईश्वरी करनी या योग-सामर्थ्य है! भूतों को उत्पन्न करनेवाला आत्मा, उनका पालन करके भी (फिर) उनमें नहीं है!

— Lokmanya Tilak

अध्याय ९, श्लोक ९.५