मूल श्लोक
न च मत्स्थानि भूतानि पश्य मे योगमैश्वरम् ।भूतभृन्न च भूतस्थो ममात्मा भूतभावनः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
na ca matsthāni bhūtāni paśya me yogamaiśvaram bhūtabhṛnna ca bhūtastho mamātmā bhūtabhāvanaḥ
अनुवाद
और मुझमें सब भूत भी नहीं हैं! देखो, (यह कैसी) मेरी ईश्वरी करनी या योग-सामर्थ्य है! भूतों को उत्पन्न करनेवाला आत्मा, उनका पालन करके भी (फिर) उनमें नहीं है!