मूल श्लोक
मया ततमिदं सर्वं जगदव्यक्तमूर्तिना ।मत्स्थानि सर्वभूतानि न चाहं तेष्ववस्थितः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
mayā tatamidaṃ sarvaṃ jagadavyaktamūrtinā matsthāni sarvabhūtāni na cāhaṃ teṣvavasthitaḥ
अनुवाद
मैंने अपने अव्यक्त स्वरूप से इस समग्र जगत को फैलाया अथवा व्याप्त किया है। मुझमें सब भूत है, (परन्तु) मैं उनमें नहीं हूँ।