भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ९.२० ·

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मूल श्लोक

त्रैविद्या मां सोमपाः पूतपापाः यज्ञैरिष्ट्वा स्वर्गतिं प्रार्थयन्ते ।ते पुण्यमासाद्य सुरेन्द्रलोकमश्नन्ति दिव्यान्दिवि देवभोगान् ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

traividyā māṃ somapāḥ pūtapāpāḥ yajñairiṣṭvā svargatiṃ prārthayante te puṇyamāsādya surendralokamaśnanti divyāndivi devabhogān

९.२०अध्याय ९ · राजविद्याराजगुह्ययोग३४ में से श्लोक २०

अनुवाद

जो त्रेविद्य अर्थात् ऋक्, यजु और साम इन तीन वेदों के कर्म करनेवाले, सोम पीने वाले अर्थात् सोमयाजी, तथा निष्पाप (पुरुष) यज्ञ से मेरी पूजा करके स्वर्गलोकप्राप्ति की इच्छा करते हैं, वे इन्द्र के पुण्यलोक में पहुँच कर स्वर्ग में देवताओं के अनेक दिव्य भोग भोगते है।

— Lokmanya Tilak

अध्याय ९, श्लोक ९.२०