मूल श्लोक
गतिर्भर्ता प्रभुः साक्षी निवासः शरणं सुहृत् ।प्रभवः प्रलयः स्थानं निधानं बीजमव्ययम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
gatirbhartā prabhuḥ sākṣī nivāsaḥ śaraṇaṃ suhṛt prabhavaḥ pralayaḥ sthānaṃ nidhānaṃ bījamavyayam
अनुवाद
(सब की) गति, (सब का) पोषक, प्रभु, साक्षी, निवास, शरण, सखा, उत्पत्ति, प्रलय, स्थिति, निधान और अव्यय बीज भी मैं हूँ।