मूल श्लोक
अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम् ।यः प्रयाति स मद्भावं याति नास्त्यत्र संशयः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
antakāle ca māmeva smaranmuktvā kalevaram yaḥ prayāti sa madbhāvaṃ yāti nāstyatra saṃśayaḥ
अनुवाद
और अन्तकाल में जो मेरा स्मरण करता हुआ देह त्यागता है, वह मेरे स्वरूप में निःसन्देह मिल जाता है।