मूल श्लोक
यत्र काले त्वनावृत्तिमावृत्तिं चैव योगिनः ।प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
yatra kāle tvanāvṛttimāvṛttiṃ caiva yoginaḥ prayātā yānti taṃ kālaṃ vakṣyāmi bharatarṣabha
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! अब तुझे मैं वह काल बतलाता हूँ, कि जिस काल में (कर्म-) योगी मरने पर (इस लोक में जन्मने के लिए) लौट नहीं आते, और (जिस काल में मरने पर) लौट आते है।