भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ८.११ ·

English

मूल श्लोक

यदक्षरं वेदविदो वदन्ति विशन्ति यद्यतयो वीतरागाः ।यदिच्छन्तो ब्रह्मचर्यं चरन्ति तत्ते पदं सङ्ग्रहेण प्रवक्ष्ये ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

yadakṣaraṃ vedavido vadanti viśanti yadyatayo vītarāgāḥ yadicchanto brahmacaryaṃ caranti tatte padaṃ saṅgraheṇa pravakṣye

८.११अध्याय ८ · अक्षरब्रह्मयोग२८ में से श्लोक ११

अनुवाद

वेद के जानने वाले जिसे अक्षर कहते है, वीतराग होकर यति लोग जिसमें प्रवेश करते है और जिसकी इच्छा करके ब्रह्मचर्यव्रत का आचरण करते है, वह पद अर्थात् ॐकार ब्रह्म तुझे संक्षेप में बतलाता हूँ।

— Lokmanya Tilak

अध्याय ८, श्लोक ८.११