भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ७.५ ·

English

मूल श्लोक

अपरेयमितस्त्वन्यां प्रकृतिं विद्धि मे पराम् ।जीवभूतां महाबाहो ययेदं धार्यते जगत् ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

apareyamitastvanyāṃ prakṛtiṃ viddhi me parām jīvabhūtāṃ mahābāho yayedaṃ dhāryate jagat

७.५अध्याय ७ · ज्ञानयोग३० में से श्लोक ५

अनुवाद

यह अपरा अर्थात् निम्न श्रेणी की (प्रकृति) है। हे महाबाहु अर्जुन! यह जानो कि इससे भिन्न, जगत को धारण करने वाली परा अर्थात् उच्च श्रेणी की जीवनस्वरूपी मेरी दूसरी प्रकृति है।

— Lokmanya Tilak

अध्याय ७, श्लोक ७.५