मूल श्लोक
अपरेयमितस्त्वन्यां प्रकृतिं विद्धि मे पराम् ।जीवभूतां महाबाहो ययेदं धार्यते जगत् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
apareyamitastvanyāṃ prakṛtiṃ viddhi me parām jīvabhūtāṃ mahābāho yayedaṃ dhāryate jagat
अनुवाद
यह अपरा अर्थात् निम्न श्रेणी की (प्रकृति) है। हे महाबाहु अर्जुन! यह जानो कि इससे भिन्न, जगत को धारण करने वाली परा अर्थात् उच्च श्रेणी की जीवनस्वरूपी मेरी दूसरी प्रकृति है।