मूल श्लोक
भूमिरापोऽनलो वायुः खं मनो बुद्धिरेव च ।अहङ्कार इतीयं मे भिन्ना प्रकृतिरष्टधा ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
bhūmirāpo'nalo vāyuḥ khaṃ mano buddhireva ca ahaṅkāra itīyaṃ me bhinnā prakṛtiraṣṭadhā
अनुवाद
पृथ्वी, जल, अग्नि , वायु, आकाश (ये पाँच सूक्ष्म भूत), मन, बुद्धि और अंहकार इन आठ प्रकारों में मेरी प्रकृति विभाजित है।