मूल श्लोक
एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय ।अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
etadyonīni bhūtāni sarvāṇītyupadhāraya ahaṃ kṛtsnasya jagataḥ prabhavaḥ pralayastathā
अनुवाद
समझ रखो, कि इन्हीं दोनों में से सब प्राणी उत्पन्न होते हैं। सारे जगत का प्रभव अर्थात् मूल और प्रलय अर्थात् अन्त मैं ही हूँ।