मूल श्लोक
कामैस्तैस्तैर्हृतज्ञानाः प्रपद्यन्तेऽन्यदेवताः ।तं तं नियममास्थाय प्रकृत्या नियताः स्वया ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
kāmaistaistairhṛtajñānāḥ prapadyante'nyadevatāḥ taṃ taṃ niyamamāsthāya prakṛtyā niyatāḥ svayā
अनुवाद
अपनी-अपनी प्रकृति के नियमानुसार भिन्न-भिन्न (स्वर्ग आदि फलों की) काम-वासनाओं से पागल हुए लोग, भिन्न-भिन्न (उपासनाओं के) नियमों को पालकर दूसरे देवताओं को भजते रहते हैं।