भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ७.१५ ·

English

मूल श्लोक

न मां दुष्कृतिनो मूढाः प्रपद्यन्ते नराधमाः ।माययाऽपहृतज्ञाना आसुरं भावमाश्रिताः ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

na māṃ duṣkṛtino mūḍhāḥ prapadyante narādhamāḥ māyayā'pahṛtajñānā āsuraṃ bhāvamāśritāḥ

७.१५अध्याय ७ · ज्ञानयोग३० में से श्लोक १५

अनुवाद

माया ने जिनका ज्ञान नष्ट कर दिया है, ऐसे मूढ और दुष्कर्मी नराधम आसुरी बुद्धि में पड़ कर मेरी शरण में नहीं आते।

— Lokmanya Tilak

टिप्पणी

यह बतला दिया, कि माया में डूबे रहनेवाले लोग परमेश्वर को भूल जाते है और नष्ट हो जाते हैं। अब ऐसा न करनेवाले अर्थात् परमेश्वर की शरण में जाकर उसकी भक्ति करनेवाले लोगों का वर्णन करते है।

— Lokmanya Tilak

अध्याय ७, श्लोक ७.१५