भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ७.१ ·

English

मूल श्लोक

श्रीभगवानुवाच ।मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः ।असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

śrībhagavānuvāca mayyāsaktamanāḥ pārtha yogaṃ yuñjanmadāśrayaḥ asaṃśayaṃ samagraṃ māṃ yathā jñāsyasi tacchṛṇu

७.१अध्याय ७ · ज्ञानयोग३० में से श्लोक १

अनुवाद

श्रीभगवान ने कहा: हे पार्थ! मुझ में चित्त लगा कर और मेरा ही आश्रय करके (कर्म) योग का आचरण करते हुए तुझे जिस प्रकार से या जिस विधि से मेरी पूर्ण और संशयविहीन ज्ञान होगा, उसे सुन।

— Lokmanya Tilak

अध्याय ७, श्लोक ७.१