भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ६.५ ·

English

मूल श्लोक

उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत् ।आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

uddharedātmanā''tmānaṃ nātmānamavasādayet ātmaiva hyātmano bandhurātmaiva ripurātmanaḥ

६.५अध्याय ६ · अध्यात्मयोग४७ में से श्लोक ५

अनुवाद

(मनुष्य) अपना उद्धार आप ही करें। अपने आप को (कभी भी) गिरने न दे। क्योंकि (प्रत्येक मनुष्य) स्वयं ही अपना बन्धु (अर्थात् सहायक), या स्वयं अपना शत्रु है।

— Lokmanya Tilak

अध्याय ६, श्लोक ६.५