मूल श्लोक
अथवा योगिनामेव कुले भवति धीमताम् ।एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
athavā yogināmeva kule bhavati dhīmatām etaddhi durlabhataraṃ loke janma yadīdṛśam
अनुवाद
अथवा बुद्धिमान (कर्म-) योगियों के ही कुल में जन्म पाता है। इस प्रकार का जन्म (इस) लोक में बड़ा दुर्लभ है।