मूल श्लोक
प्राप्य पुण्यकृतां लोकानुषित्वा शाश्वतीः समाः ।शुचीनां श्रीमतां गेहे योगभ्रष्टोऽभिजायते ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
prāpya puṇyakṛtāṃ lokānuṣitvā śāśvatīḥ samāḥ śucīnāṃ śrīmatāṃ gehe yogabhraṣṭo'bhijāyate
अनुवाद
पुण्यकर्ता पुरुषों को मिलने वाले (स्वर्ग आदि) लोकों को पा कर और (वहाँ) बहुत वर्षों तक निवास कर के फिर यह योगभ्रष्ट अर्थात् कर्मयोग से भ्रष्ट पुरुष पवित्र श्रीमान् लोगों के घर में जन्म लेता है;