मूल श्लोक
श्रीभगवानुवाच ।पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते ।न हि कल्याणकृत्कश्चिद्दुर्गतिं तात गच्छति ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
śrībhagavānuvāca pārtha naiveha nāmutra vināśastasya vidyate na hi kalyāṇakṛtkaściddurgatiṃ tāta gacchati
अनुवाद
श्रीभगवान ने कहा: हे पार्थ! क्या इस लोक में और क्या परलोक में ऐसे पुरुष का कभी विनाश होता नहीं। क्योंकि हे तात! कल्याणकारक कर्म करनेवाले किसी भी पुरुष की दुर्गति नहीं होती।