भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ६.३१ ·

English

मूल श्लोक

सर्वभूतस्थितं यो मां भजत्येकत्वमास्थितः ।सर्वथा वर्त्तमानोऽपि स योगी मयि वर्तते ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

sarvabhūtasthitaṃ yo māṃ bhajatyekatvamāsthitaḥ sarvathā varttamāno'pi sa yogī mayi vartate

६.३१अध्याय ६ · अध्यात्मयोग४७ में से श्लोक ३१

अनुवाद

जो एकत्वबुद्धि अर्थात् सर्वभूतात्मैक्यबुद्धि को मन में रखकर सब प्राणियों में रहने वाले मुझको (परमेश्वर को) भजता है, वह (कर्म-) योगी सब प्रकार से बर्ता हुआ भी मुझमें रहता है।

— Lokmanya Tilak

अध्याय ६, श्लोक ६.३१