मूल श्लोक
विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि ।शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
vidyāvinayasampanne brāhmaṇe gavi hastini śuni caiva śvapāke ca paṇḍitāḥ samadarśinaḥ
अनुवाद
पंडितों की अर्थात् ज्ञानियों की दृष्टि विद्या-विनययुक्त ब्राह्मण, गाय, हाथी, ऐसे ही कुत्ता और चांडाल, सभी के विषय में समान रहती है।