भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ५.१७ ·

English

मूल श्लोक

तद्बुद्धयस्तदात्मानस्तन्निष्ठास्तत्परायणाः ।गच्छन्त्यपुनरावृत्तिं ज्ञाननिर्धूतकल्मषाः ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

tadbuddhayastadātmānastanniṣṭhāstatparāyaṇāḥ gacchantyapunarāvṛttiṃ jñānanirdhūtakalmaṣāḥ

५.१७अध्याय ५ · संन्यासयोग२९ में से श्लोक १७

अनुवाद

और उस परमार्थ-तत्त्व में ही जिनकी बुद्धि रंग जाती है, वही जिनका अन्तःकरण रम जाता है और जो तन्निष्ट एवं तत्परायण हो जाते हैं, उनके पाप ज्ञान से बिलकुल धुल जाते है और वे फिर जन्म नहीं लेते।

— Lokmanya Tilak

टिप्पणी

इस प्रकार जिसका अज्ञान नष्ट हो जाएँ, उस कर्मयोगी की (संन्यासी की नहीं) ब्रह्मभूत या जीवन्मुक्त अवस्था का अब अधिक वर्णन करते हैं –

— Lokmanya Tilak

अध्याय ५, श्लोक ५.१७