मूल श्लोक
ब्रह्मण्याधाय कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा करोति यः ।लिप्यते न स पापेन पद्मपत्रमिवाम्भसा ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
brahmaṇyādhāya karmāṇi saṅgaṃ tyaktvā karoti yaḥ lipyate na sa pāpena padmapatramivāmbhasā
अनुवाद
जो ब्रह्म में अर्पण कर आसक्ति -विरहित कर्म करता है, उसको वैसे ही पाप नहीं लगता, जैसे कि कमल के पत्ते को पानी नहीं लगता।