मूल श्लोक
श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः ।ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
śraddhāvām̐llabhate jñānaṃ tatparaḥ saṃyatendriyaḥ jñānaṃ labdhvā parāṃ śāntimacireṇādhigacchati
अनुवाद
जो श्रद्धावान पुरुष इन्द्रियसंयम करके उसी के पीछे पड़ा रहे, उसे (भी) यह ज्ञान मिल जाता है, और ज्ञान प्राप्त हो जाने से तुरन्त ही उसे परम शान्ति प्राप्त होती है।
टिप्पणी
सारांश, बुद्धि से जो ज्ञान और शान्ति प्राप्त होगी, वही श्रद्धा से भी मिलता है (देखो गी॰ 13.25 )
— Lokmanya Tilak