मूल श्लोक
तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया ।उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
tadviddhi praṇipātena paripraśnena sevayā upadekṣyanti te jñānaṃ jñāninastattvadarśinaḥ
अनुवाद
ध्यान में रख, कि प्रणिपात से, प्रश्न करने से और सेवा से तत्त्ववेत्ता ज्ञानी पुरुष तुझे उस ज्ञान का उपदेश करेंगे;