मूल श्लोक
श्रोत्रादीनीन्द्रियाण्यन्ये संयमाग्निषु जुह्वति ।शब्दादीन्विषयानन्य इन्द्रियाग्निषु जुह्वति ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
śrotrādīnīndriyāṇyanye saṃyamāgniṣu juhvati śabdādīnviṣayānanya indriyāgniṣu juhvati
अनुवाद
और कोई श्रौत आदि (कान, आँख आदि) इन्द्रियों का संयमरूप अग्नि में होम करते है; और कुछ लोग इन्द्रिय रूप अग्नि में (इन्द्रियों के) शब्द आदि विषयों का हवन करते है।