मूल श्लोक
एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदुः ।स कालेनेह महता योगो नष्टः परन्तप ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
evaṃ paramparāprāptamimaṃ rājarṣayo viduḥ sa kāleneha mahatā yogo naṣṭaḥ parantapa
अनुवाद
ऐसी परम्परा से प्राप्त हुए इस (योग) को राजर्षियों ने जाना। परन्तु हे शत्रुतापन (अर्जुन)! दीर्घकाल के अनन्तर वही योग इस लोक में नष्ट हो गया।