भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ४.१९ ·

English

मूल श्लोक

यस्य सर्वे समारम्भाः कामसङ्कल्पवर्जिताः ।ज्ञानाग्निदग्धकर्माणं तमाहुः पण्डितं बुधाः ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

yasya sarve samārambhāḥ kāmasaṅkalpavarjitāḥ jñānāgnidagdhakarmāṇaṃ tamāhuḥ paṇḍitaṃ budhāḥ

४.१९अध्याय ४ · ज्ञानविभागयोग४२ में से श्लोक १९

अनुवाद

ज्ञानी पुरुष उसी को पण्डित कहते है, कि जिसके सभी समारम्भ अर्थात् उद्योग फल की इच्छा से विरहित होते है और जिसके कर्म ज्ञानाग्नि से भस्म हो जाते है।

— Lokmanya Tilak

टिप्पणी

'ज्ञान से कर्म भस्म होते है,' इसका अर्थ कर्मों को छोड़ना नहीं है, किन्तु इस श्लोक से प्रगट होता है कि फल की इच्छा छोड़कर कर्म करना यही अर्थ यहाँ लेना चाहिए (गीतार॰ पृ. 285 – 289 देखो)। इसी प्रकार आगे भगवद्भक्त के वर्णन में 'सर्वारम्भपरित्यागी' – समस्त आरम्भ या उद्योग छोड़ने वाला – पद आया है (गी॰ 12.16; 14.25) उसके अर्थ का निर्णय भी इससे हो जाता है, अब इसी अर्थ को अधिक स्पष्ट करते है –

— Lokmanya Tilak

अध्याय ४, श्लोक ४.१९