मूल श्लोक
ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् ।मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
ye yathā māṃ prapadyante tāṃstathaiva bhajāmyaham mama vartmānuvartante manuṣyāḥ pārtha sarvaśaḥ
अनुवाद
जो मुझे जिस प्रकार से भजते है, उन्हें मैं उसी प्रकार के फल देता हूँ। हे पार्थ! किसी भी ओर से हो, मनुष्य मेरे ही मार्ग में आ मिलते हैं।
टिप्पणी
'मम वर्त्मानुवर्तन्ते' इत्यादि उत्तरार्ध पहले (3.23) कुछ निराले अर्थ में आया है, और इससे ध्यान में आवेगा, कि गीता में पूर्वापर सन्दर्भ के अनुसार अर्थ कैसे बदल जाता है। यद्यपि यह सच है, कि किसी मार्ग से जाने पर भी मनुष्य परमेश्वर की ही ओर जाता है, तो भी यह जानना चाहिए कि अनेक लोग अनेक मार्गों से क्यों जाते हैं? अब इसका कारण बतलाते है –
— Lokmanya Tilak