मूल श्लोक
इन्द्रियाणि मनो बुद्धिरस्याधिष्ठानमुच्यते ।एतैर्विमोहयत्येष ज्ञानमावृत्य देहिनम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
indriyāṇi mano buddhirasyādhiṣṭhānamucyate etairvimohayatyeṣa jñānamāvṛtya dehinam
अनुवाद
इन्द्रियों को, मन को और बुद्धि को, इसका अधिष्ठान अर्थात् घर या गढ़ कहते है। इनके आश्रय से ज्ञान को लपेट कर (ढककर) यह मनुष्य को भुलावे में डाल देता है।