भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ३.३९ ·

English

मूल श्लोक

आवृतं ज्ञानमेतेन ज्ञानिनो नित्यवैरिणा ।कामरूपेण कौन्तेय दुष्पूरेणानलेन च ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

āvṛtaṃ jñānametena jñānino nityavairiṇā kāmarūpeṇa kaunteya duṣpūreṇānalena ca

३.३९अध्याय ३ · कर्मयोग४३ में से श्लोक ३९

अनुवाद

हे कौन्तेय! ज्ञाता का यह कामरूपी नित्यवैरी कभी भी तृप्त न होना वाला अग्नि ही है; इसने ज्ञान को ढक रखा है।

— Lokmanya Tilak

टिप्पणी

यह मनु के ही कथन का अनुवाद है; मनु ने कहा है कि 'न जातु कामः कामानामुपभोगेन शाम्यति। हविषा कृष्णवर्त्मेव भूय एवाभिवर्धते' (मनु॰ 2.94) – काम के उपयोगों से काम कभी अघाता नहीं है, बल्कि ईंधन डालने पर अग्नि जैसा बढ़ जाता है, इसी प्रकार यह भी अधिकाधिक बढ़ता जाता है (देखो गीतार॰ पृ. 105)

— Lokmanya Tilak

अध्याय ३, श्लोक ३.३९