मूल श्लोक
सदृशं चेष्टते स्वस्याः प्रकृतेर्ज्ञानवानपि ।प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रहः किं करिष्यति ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
sadṛśaṃ ceṣṭate svasyāḥ prakṛterjñānavānapi prakṛtiṃ yānti bhūtāni nigrahaḥ kiṃ kariṣyati
अनुवाद
ज्ञानी पुरुष भी अपनी प्रकृति के अनुसार बर्ता है। सभी प्राणी (अपनी-अपनी) प्रकृति के अनुसार रहते है, (वहाँ) निग्रह (जबरदस्ती) क्या करेगा?