मूल श्लोक
ये मे मतमिदं नित्यमनुतिष्ठन्ति मानवाः ।श्रद्धावन्तोऽनसूयन्तो मुच्यन्ते तेऽपि कर्मभिः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
ye me matamidaṃ nityamanutiṣṭhanti mānavāḥ śraddhāvanto'nasūyanto mucyante te'pi karmabhiḥ
अनुवाद
जो श्रद्धावान (पुरुष) दोषों को न खोजकर मेरे इस मत के अनुसार नित्य बर्ताव करते है, वे भी कर्म से अर्थात् कर्म-बन्धन से मुक्त हो जाते है।