मूल श्लोक
मयि सर्वाणि कर्माणि संन्यस्याऽध्यात्मचेतसा ।निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
mayi sarvāṇi karmāṇi saṃnyasyā'dhyātmacetasā nirāśīrnirmamo bhūtvā yudhyasva vigatajvaraḥ
अनुवाद
(इसलिए हे अर्जुन!) मुझ में अध्यात्म बुद्धि से सब कर्मों का संन्यास अर्थात् अर्पण करके आर (फल की) आशा एवं ममता छोड़कर तू निश्चिन्त हो करके युद्ध कर।
टिप्पणी
अब यह बतलाते है कि इस उपदेश के अनुसार बर्ताव करने से क्या फल मिलता है और बर्ताव न करने से कैसी गति होती है –
— Lokmanya Tilak