मूल श्लोक
प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः ।अहङ्कारविमूढात्मा कर्ताऽहमिति मन्यते ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
prakṛteḥ kriyamāṇāni guṇaiḥ karmāṇi sarvaśaḥ ahaṅkāravimūḍhātmā kartā'hamiti manyate
अनुवाद
प्रकृति के (सत्त्व-रज-तम) गुणों से सब प्रकार कर्म हुआ करते हैं; पर अहंकार से मोहित (अज्ञानी पुरुष) समझता है कि मैं कर्ता हूँ;