मूल श्लोक
कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः ।जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
karmajaṃ buddhiyuktā hi phalaṃ tyaktvā manīṣiṇaḥ janmabandhavinirmuktāḥ padaṃ gacchantyanāmayam
अनुवाद
(समत्व) बुद्धि से युक्त (जो) ज्ञानी पुरुष कर्मफल का त्याग करते है, वे जन्म के बन्ध से मुक्त होकर (परमेश्वर के) दुःखविरहित पद को जा पहुँचते हैं।