मूल श्लोक
यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः ।वेदवादरताः पार्थ नान्यदस्तीति वादिनः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
yāmimāṃ puṣpitāṃ vācaṃ pravadantyavipaścitaḥ vedavādaratāḥ pārtha nānyadastīti vādinaḥ
अनुवाद
हे पार्थ! (कर्मकांडात्मक) वेदों के (फलश्रुति-युक्त) वाक्यों में भूले हुए और यह कहने वाले मूढ लोग कि इसके अतिरिक्त दूसरा कुछ नहीं है, बढ़ा कर कहते है कि –