मूल श्लोक
तच्च संस्मृत्य संस्मृत्य रूपमत्यद्भुतं हरेः ।विस्मयो मे महान् राजन् हृष्यामि च पुनः पुनः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
tacca saṃsmṛtya saṃsmṛtya rūpamatyadbhutaṃ hareḥ vismayo me mahān rājan hṛṣyāmi ca punaḥ punaḥ
अनुवाद
और हे राजा श्रीहरि के उस अत्यन्त अद्भुत विश्वरूप की भी बार-बार स्मृति होकर मुझे बड़ा विस्मय होता है और बार-बार हर्ष होता है।