मूल श्लोक
राजन्संस्मृत्य संस्मृत्य संवादमिममद्भुतम् ।केशवार्जुनयोः पुण्यं हृष्यामि च मुहुर्मुहुः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
rājansaṃsmṛtya saṃsmṛtya saṃvādamimamadbhutam keśavārjunayoḥ puṇyaṃ hṛṣyāmi ca muhurmuhuḥ
अनुवाद
हे राजा (धृतराष्ट्र)! केशव और अर्जुन के इस अद्भुत एवं पुण्यकारक संवाद का स्मरण होकर मुझे बार-बार हर्ष हो रहा है;