मूल श्लोक
सञ्जय उवाच ।इत्यहं वासुदेवस्य पार्थस्य च महात्मनः ।संवादमिममश्रौषमद्भुतं रोमहर्षणम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
sañjaya uvāca ityahaṃ vāsudevasya pārthasya ca mahātmanaḥ saṃvādamimamaśrauṣamadbhutaṃ romaharṣaṇam
अनुवाद
संजय ने कहा: इस प्रकार शरीर को रोमांचित करनेवाला वासुदेव और महात्मा अर्जुन का यह अद्भुत संवाद मैंने सुना।