मूल श्लोक
कच्चिदेतच्छ्रुतं पार्थ त्वयैकाग्रेण चेतसा ।कच्चिदज्ञानसम्मोहः प्रणष्टस्ते धनञ्जय ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
kaccidetacchrutaṃ pārtha tvayaikāgreṇa cetasā kaccidajñānasammohaḥ praṇaṣṭaste dhanañjaya
अनुवाद
हे पार्थ! तुमने इसे एकाग्र मन से सुन तो लिया है न? (और) हे धनंजय! तुम्हारा अज्ञानरूपी मोह अब सर्वथा नष्ट हुआ कि नहीं?