मूल श्लोक
न च तस्मान्मनुष्येषु कश्चिन्मे प्रियकृत्तमः ।भविता न च मे तस्मादन्यः प्रियतरो भुवि ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
na ca tasmānmanuṣyeṣu kaścinme priyakṛttamaḥ bhavitā na ca me tasmādanyaḥ priyataro bhuvi
अनुवाद
उसकी अपेक्षा मेरा अधिक प्रिय करनेवाला सम्पूर्ण मनुष्यों में दूसरा कोई भी न मिलेगा, तथा इस भूमि में मुझे उसकी अपेक्षा अधिक प्रिय और कोई न होगा।
टिप्पणी
परम्परा की रक्षा के इस उपदेश के साथ ही अब फल बतलाते हैं–
— Lokmanya Tilak