मूल श्लोक
य इदं परमं गुह्यं मद्भक्तेष्वभिधास्यति ।भक्तिं मयि परां कृत्वा मामेवैष्यत्यसंशयम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
ya idaṃ paramaṃ guhyaṃ madbhakteṣvabhidhāsyati bhaktiṃ mayi parāṃ kṛtvā māmevaiṣyatyasaṃśayam
अनुवाद
जो यह परम गुह्य मेरे भक्तों को बतलावेगा, उसकी मुझ पर परम भक्ति होगी और वह निस्सन्देह मुझ में ही आ मिलेगा।