मूल श्लोक
यदहङ्कारमाश्रित्य न योत्स्य इति मन्यसे ।मिथ्यैष व्यवसायस्ते प्रकृतिस्त्वां नियोक्ष्यति ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
yadahaṅkāramāśritya na yotsya iti manyase mithyaiṣa vyavasāyaste prakṛtistvāṃ niyokṣyati
अनुवाद
तू अहंकार से जो यह मानता (कहता) है, कि मैं युद्ध न करूँगा, (सो) तेरा यह निश्चय व्यर्थ है। प्रकृति अर्थात् स्वभाव तुझसे वह (युद्ध) करावेगा।