मूल श्लोक
स्वभावजेन कौन्तेय निबद्धः स्वेन कर्मणा ।कर्तुं नेच्छसि यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि तत् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
svabhāvajena kaunteya nibaddhaḥ svena karmaṇā kartuṃ necchasi yanmohātkariṣyasyavaśo'pi tat
अनुवाद
हे कौन्तेय! अपने स्वभावजन्य कर्म से बद्ध होने के कारण, मोह के वश होकर तू जिस न करने की इच्छा करता है, पराधीन (अर्थात् प्रकृति के अधीन) हो करके तुझे वही करना पड़ेगा।