मूल श्लोक
भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः ।ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते तदनन्तरम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
bhaktyā māmabhijānāti yāvānyaścāsmi tattvataḥ tato māṃ tattvato jñātvā viśate tadanantaram
अनुवाद
भक्ति से उसको मेरा तात्त्विक ज्ञान हो जाता है, कि मैं कितना हूँ और कौन हूँ; इस प्रकार मेरी तात्त्विक पहचान हो जाने पर वह मुझ में ही प्रवेश करता है;