मूल श्लोक
ब्रह्मभूतः प्रसन्नात्मा न शोचति न काङ्क्षति ।समः सर्वेषु भूतेषु मद्भक्तिं लभते पराम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
brahmabhūtaḥ prasannātmā na śocati na kāṅkṣati samaḥ sarveṣu bhūteṣu madbhaktiṃ labhate parām
अनुवाद
ब्रह्मभूत हो जाने पर प्रसन्नचित्त होकर वह न तो किसी की आकांक्षा ही करता है, और न किसी का द्वेष ही; तथा समस्त प्राणिमात्र में सम होकर मेरी परम भक्ति को प्राप्त कर लेता है।