मूल श्लोक
यत्तु कामेप्सुना कर्म साहङ्कारेण वा पुनः ।क्रियते बहुलायासं तद्राजसमुदाहृतम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
yattu kāmepsunā karma sāhaṅkāreṇa vā punaḥ kriyate bahulāyāsaṃ tadrājasamudāhṛtam
अनुवाद
परन्तु काम अर्थात् फलाशा की इच्छा रखने वाला अथवा अहंकार-बुद्धि का (मनुष्य) बड़े परिश्रम से जो कर्म करता है उसे राजस कहते हैं।