मूल श्लोक
तत्रैवं सति कर्तारमात्मानं केवलं तु यः ।पश्यत्यकृतबुद्धित्वान्न स पश्यति दुर्मतिः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
tatraivaṃ sati kartāramātmānaṃ kevalaṃ tu yaḥ paśyatyakṛtabuddhitvānna sa paśyati durmatiḥ
अनुवाद
वास्तविक स्थिति ऐसी होने पर भी जो संस्कृत बुद्धि न होने के कारण यह समझे, कि मैं ही अकेला कर्ता हूँ (समझना चाहिए कि ), वह दुर्मति कुछ भी नहीं जानता।