भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १८.१६ ·

English

मूल श्लोक

तत्रैवं सति कर्तारमात्मानं केवलं तु यः ।पश्यत्यकृतबुद्धित्वान्न स पश्यति दुर्मतिः ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

tatraivaṃ sati kartāramātmānaṃ kevalaṃ tu yaḥ paśyatyakṛtabuddhitvānna sa paśyati durmatiḥ

१८.१६अध्याय १८ · मोक्षसंन्यासयोग७८ में से श्लोक १६

अनुवाद

वास्तविक स्थिति ऐसी होने पर भी जो संस्कृत बुद्धि न होने के कारण यह समझे, कि मैं ही अकेला कर्ता हूँ (समझना चाहिए कि ), वह दुर्मति कुछ भी नहीं जानता।

— Lokmanya Tilak

अध्याय १८, श्लोक १८.१६